आज 'इंडियन मीडिया फोरम' के तत्वाधान में "बदलते परिवेश में भाषा" विषय पर
एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया | संगोष्ठी की अध्यक्षता 'भारतीय साहित्यकार
संघ' के अध्यक्ष डॉ वेद व्यथित जी ने की | हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओँ की
स्थिति, वैश्विक स्तर पर उनके हालत और प्रवासी भारतीयों का हिंदी के
प्रसार में योगदान, भाषा आन्दोलन, भाषा को लेकर राज्य की भूमिका, भाषा पर
सांस्कृतिक प्रभाव, भाषा पर आर्थिक प्रभाव आदि विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई
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डॉ वेद व्यथित ने कहा कि 'भाषा पर अधिकार सम्मान दिलाता है | यदि आप प्रांजल भाषा बोलते हैं, भाषा पर आपका पूर्ण अधिकार है तो हिंदी बोलने पर भी उतना ही सम्मान मिलता है जितना की अंग्रेजी बोलने पर | भाषा पर अधिकार होने के साथ ही भाषा को लेकर स्वाभिमान की जरुरत है | अगर ये दोनों चीजें आपके पास हैं तो फिर हिंदी को भी उतने ही सम्मान से लोग स्वीकारते हैं जितना की अन्य कोई विदेशी भाषा |'
डॉ वेद व्यथित ने कहा कि 'भाषा पर अधिकार सम्मान दिलाता है | यदि आप प्रांजल भाषा बोलते हैं, भाषा पर आपका पूर्ण अधिकार है तो हिंदी बोलने पर भी उतना ही सम्मान मिलता है जितना की अंग्रेजी बोलने पर | भाषा पर अधिकार होने के साथ ही भाषा को लेकर स्वाभिमान की जरुरत है | अगर ये दोनों चीजें आपके पास हैं तो फिर हिंदी को भी उतने ही सम्मान से लोग स्वीकारते हैं जितना की अन्य कोई विदेशी भाषा |'
