“डिजिटल युग में नैतिकता और मोरल पोलिसिंग” से परिचित हुए युवा
आज रविवार, 25 दिसम्बर 2016 को इंडिया
इंटरनेशनल सेंटर में “इंडियन मीडिया फोरम” के तत्वाधान में
"Morality
& Moral Policing in Digital Age (डिजिटल युग में नैतिकता और
मोरल पोलिसिंग)” विषय पर एक परिचर्चा आयोजित की गई. कार्यक्रम के मुख्य वक्ता
अंतर्राष्ट्रीय योग गुरु एवम आईसीसीआर की गवर्निंग बॉडी के सदस्य डॉक्टर वरुण वीर थे.
अन्य वक्ताओं में वरिष्ठ पत्रकार और प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के सदस्य श्री मनीष
ठाकुर जी, दिल्ली सरकार में श्रम आयुक्त श्री मुनीश कुमार गौड़ जी, वरिष्ठ पत्रकार
श्री सुरेन्द्र सिंघल जी, उच्चतम न्यायलय में वकील श्री अभिषेक शर्मा जी उपस्थित
थे.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि
टीवी 100 समाचार चैनल के सीईओ श्री सुरेन्द्र गुप्ता जी थे. परिचर्चा में विशिष्ट
अतिथि दिल्ली विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के पूर्व अध्यक्ष श्री रमेश
भारद्वाज जी एवं मणिपुरी फिल्म निर्माता सुश्री संगीता ताखलियुम जी थे. इस विषय पर
परिचर्चा में ऑर्गनाइजर पत्रिका के पत्रकार श्री प्रमोद सैनी जी, दूरदर्शन से
नवनीत चतुर्वेदी जी समेत विभिन्न पत्रकारों ने भी अपने विचार रखे. परिचर्चा का
आरम्भ उपस्थित वक्ताओं के स्वागत एवं सम्मान के साथ किया गया. इंडियन मीडिया फोरम
के संस्थापक सदस्य एवं परिचर्चा संचालक श्री रामेन्द्र मिश्रा जी ने इंडियन मीडिया
फोरम के बारे में सभी को अवगत कराया.
दूरदर्शन के पत्रकार नवनीत चतुर्वेदी ने परिचर्चा प्रारंभ
करते हुए नैतिक जिम्मेदारी के निर्वहन पर जोर देते हुए धार्मिक नैतिकता को
प्राथमिकता दिया और मोरल पोलिसिंग को जायज ठहराया. वहीँ यूनेस्को के श्री कौशल
प्रकाश ने नैतिकता की आड़ में महिला-पुरुष में भेदभाव, स्त्रियों
के कपड़ों पर मोरल पोलिसिंग इत्यादि विषयों को छुआ.
परिचर्चा को आगे बढ़ाते हुए
उच्चतम न्यायालय के वरिष्ठ वकील श्री अभिषेक शर्मा जी ने नैतिकता के कानूनी पक्ष
से युवाओं को अवगत कराया एवम् इंटरनेट के गलत उपयोग से नैतिकता के हो रहे हनन को
चिंताजनक माना. उन्होंने कहा कि नैतिकता शब्द नीति से बना है. श्रम आयुक्त श्री
मुनीश कुमार गौड़ जी ने नैतिकता को परिभाषित करते हुए स्वनियंत्रण के साथ, मोरल
पोलिसिंग के बजाय मोरल ट्रेनिंग पर जोर दिया. सिटिज़न जर्नलिस्ट तुषार अग्रवाल और
दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व उपाध्यक्षा प्रिया डबास ने इस मुद्दे पर विभिन्न
उदाहरणों से युवा मन की बात रखी.
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता
डॉक्टर वरुण वीर जी ने “डिजिटल
युग में नैतिकता एवम् मोरल पोलिसिंग” विषय पर भारत की संस्कृति, सभ्यता एवं
रामायण-महाभारत के उदाहरणों से जोड़ कर विषय को विस्तार देते हुए अनेक प्रश्न खड़े
किये. उन्होंने बताया कि धर्म की स्थापना एवं राष्ट्र-समाज रक्षा के लिए और अनैतिक
व्यक्ति या अनैतिक वृत्तियों के नाश के लिए कभी-कभी अनैतिकता का सहारा भी लेना
पड़ता है किन्तु वो अधर्म या अनैतिक नहीं कतई नहीं है. मूल बात आपके उददेश्य,
दृष्टि और दृष्टिकोण की है.
इस परिचर्चा में दिल्ली
विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया, इन्द्रप्रस्थ विश्वविद्यालय तथा राजधानी के
विभिन्न कॉलेजों के पत्रकारिता और कानून के विद्यार्थियों समेत अन्य गणमान्य लोगों
ने भाग लिया. इंडियन मीडिया फोरम के अध्यक्ष श्री अरुण उपाध्याय, संस्थापक सदस्य
श्री रामेन्द्र मिश्र के साथ ही, अंजनी कुमार, तुषार अग्रवाल, रोहित पाण्डेय, वर्षा मेहरा, प्रार्थना सिंह, रंजीत मिश्रा आदि ने अपने सामूहिक प्रयासों से
कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया. इसके लिए अतिथियों एवं वक्ताओं ने पूरी टीम
की भूरि-भूरि प्रशंसा की.
अंजनी कुमार तिवारी
पत्रकारिता
विभाग, दिल्ली
विश्विद्यालय
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